वसन्त पंचमी पर विशेष

लाईन ऑफ कंट्रोल

का प्रामाणिक दस्तावेज

सरहदः जीरो मील

मूल्य 120 रुपये मात्र
2 फरवरी 2025 तक आदेश करने पर डाक खर्च माफ

Sarhad Zero Mile
Sarhad: Zero Mile, Back Cover

सरहद जीरो मील भारत और पाकिस्तान के बीच की नियंत्रण रेखा (लाईन ऑफ कंट्रोल) के साथ की जिन्दगी का आँखों देखा हाल है। लेखक, पत्रकार एवं फिल्मकार रंजन कुमार सिंह उन थोड़े से लोगों में हैं, जिन्होंने लाईन ऑफ कंट्रोल के साथ-साथ सफर किया है। उनकी यह यात्रा अखनूर के संगम पोस्ट से शुरु होकर द्रास एवं करगिल होते हुए लद्दाख के परतापुर में खत्म हुई जोकि सियाचिन का बेस कैम्प है। इस क्रम में वह चुशूल भी पहुंचे जो भारत एवं चीन के बीच लाईन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल का हिस्सा है। इस बीच उन्होंने सरहद पर फौजियों की जिन्दगी को तो करीब से देखा ही, आम जन-जीवन से भी रू-ब-रू हुए। इस चुनौती भरी यात्रा के दौरान उन्होंने अनेक रातें फौजियों के साथ उनके बंकर में गुजारीं और सीमा पर बमबारी के चश्मदीद बने। अपना तमाम अनुभव उन्होंने अपनी पुस्तक सरहद जीरों मील में साझा किया है जो भारत एवं पाकिस्तान के बीच की विवादित नियंत्रण-रेखा का जीवन्त इतिहास भी है और भूगोल भी। इस पुस्तक को रक्षा मंत्रालय के राजभाषा पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। रंजन ने सरहद की जिन्दगी पर एक दुनिया सरहद की नाम से टीवी फिल्म भी बनाई है। 

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